श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 91: महर्षि लोमशका आगमन और युधिष्ठिरसे अर्जुनके पाशुपत आदि दिव्यास्त्रोंकी प्राप्तिका वर्णन तथा इन्द्रका संदेश सुनाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.91.14 
विश्वावसोस्तु तनयाद् गीतं नृत्यं च साम च।
वादित्रं च यथान्यायं प्रत्यविन्दद् यथाविधि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'केवल इतना ही नहीं, उसने विश्वावसु के पुत्र से नृत्य, गान, सामगान और वाद्यों की भी विधिवत शिक्षा प्राप्त की है।॥14॥
 
‘Not only this, he has also received proper training in dance, song, Sama Gaan and musical instruments from the son of Viśvavasu.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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