श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 91: महर्षि लोमशका आगमन और युधिष्ठिरसे अर्जुनके पाशुपत आदि दिव्यास्त्रोंकी प्राप्तिका वर्णन तथा इन्द्रका संदेश सुनाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.91.13 
यमात् कुबेराद् वरुणादिन्द्राच्च कुरुनन्दन।
अस्त्राण्यधीतवान् पार्थो दिव्यान्यमितविक्रम:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'कुरुनन्दन! असीम पराक्रमी अर्जुन ने यम, कुबेर, वरुण और इन्द्र से दिव्यास्त्रों का अध्ययन किया है। 13॥
 
'Kurunandan! The infinitely mighty Arjuna has studied divine weapons from Yama, Kuber, Varun and Indra. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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