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mahabharat 3.90.30-31h: वह सनातन परब्रह्म और परम पद है, जिसे जानकर शास्त्रज्ञ पुरुष कभी शोक नहीं करते। वहाँ मुनि, सिद्ध और सभी तपस्वी निवास करते हैं ॥30 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  3.90.30-31h 
शाश्वतं परमं चैव धातारं परमं पदम्।
यं विदित्वा न शोचन्ति विद्वांस: शास्त्रदृष्टय:॥ ३०॥
तत्र देवर्षय: सिद्धा: सर्वे चैव तपोधना:।
 
 
अनुवाद
वह सनातन परब्रह्म और परम पद है, जिसे जानकर शास्त्रज्ञ पुरुष कभी शोक नहीं करते। वहाँ मुनि, सिद्ध और सभी तपस्वी निवास करते हैं ॥30 1/2॥
 
He is the eternal Supreme Being and the Supreme Position, after knowing which the learned men of the scriptures never grieve. There reside the sages, Siddhas and all the ascetics. ॥30 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)