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mahabharat 3.90.26: राजा! प्राचीन काल से ही विशाल बद्री के पास गंगा जी कहीं गर्म जल और कहीं शीतल जल लेकर बहती आ रही हैं। उनकी रेत स्वर्ण के समान चमकती रहती है॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 3.90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.90.26 
उष्णतोयवहा गङ्गा शीततोयवहा पुरा।
सुवर्णसिकता राजन् विशालां बदरीमनु॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजा! प्राचीन काल से ही विशाल बद्री के पास गंगा जी कहीं गर्म जल और कहीं शीतल जल लेकर बहती आ रही हैं। उनकी रेत स्वर्ण के समान चमकती रहती है॥ 26॥
 
King! Since ancient times, Ganga has been flowing near the huge Badri with hot water at some places and cold water at other places. Its sand keeps shining like gold.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)