श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.90.23 
भृगुर्यत्र तपस्तेपे महर्षिगणसेविते।
राजन् स आश्रम: ख्यातो भृगुतुङ्गो महागिरि:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
राजन! जिस महान पर्वत पर भृगुन ने महर्षियों से युक्त होकर तपस्या की थी, वह भृगुतुंग आश्रम के नाम से प्रसिद्ध है। 23॥
 
Rajan! The great mountain on which Bhrigun performed penance served by Maharishis is famous by the name of Bhrigutung Ashram. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)