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mahabharat 3.90.22: कुरुनन्दन! सनत्कुमार ने सबसे पहले पुण्यमय कनखल की यात्रा की थी। वहाँ पुरु नाम का एक प्रसिद्ध पर्वत है, जहाँ प्राचीन काल में पुरुरवान् ने यात्रा की थी। 22॥   |   mahabharat अध्याय 3.90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.90.22 
सनत्कुमार: कौरव्य पुण्यं कनखलं तथा।
पर्वतश्च पुरुर्नाम यत्र यात: पुरूरवा:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! सनत्कुमार ने सबसे पहले पुण्यमय कनखल की यात्रा की थी। वहाँ पुरु नाम का एक प्रसिद्ध पर्वत है, जहाँ प्राचीन काल में पुरुरवान् ने यात्रा की थी। 22॥
 
Kurunandan! Sanatkumar had first traveled to the virtuous Kankhal. There is a famous mountain named Puru, where Pururvan had traveled in ancient times. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)