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mahabharat 3.90.20-21: युधिष्ठिर! पर्वतों में श्रेष्ठ हिमालय किरातों और किन्नरों का निवास स्थान है। गंधर्व, यक्ष, राक्षस और अप्सराएँ सदैव वहाँ आते रहते हैं। जिस पवित्र स्थान पर गंगा अपने वेग से पर्वत को चीरकर प्रकट हुई थीं, वह गंगाद्वार (हरिद्वार) के नाम से प्रसिद्ध है। राजन्! ब्रह्मऋषिगण सदैव उस तीर्थ पर आते हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  3.90.20-21 
गन्धर्वयक्षरक्षोभिरप्सरोभिश्च सेवितम्।
किरातकिन्नरावासं शैलं शिखरिणां वरम्॥ २०॥
बिभेद तरसा गङ्गा गङ्गाद्वारं युधिष्ठिर।
पुण्यं तत् ख्यायते राजन् ब्रह्मर्षिगणसेवितम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! पर्वतों में श्रेष्ठ हिमालय किरातों और किन्नरों का निवास स्थान है। गंधर्व, यक्ष, राक्षस और अप्सराएँ सदैव वहाँ आते रहते हैं। जिस पवित्र स्थान पर गंगा अपने वेग से पर्वत को चीरकर प्रकट हुई थीं, वह गंगाद्वार (हरिद्वार) के नाम से प्रसिद्ध है। राजन्! ब्रह्मऋषिगण सदैव उस तीर्थ पर आते हैं।
 
Yudhishthira! The Himalayas, the greatest of mountains, is the abode of the Kiratas and the Kinnars. Gandharvas, Yakshas, Rakshasas and Apsaras always visit it. The holy place where the Ganges appeared by breaking the mountain with her force is famous as Gangadwar (Haridwar). King! The Brahmarishis always visit that pilgrimage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)