श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.90.18 
अपि चात्र महाराज स्वयं विश्वावसुर्जगौ।
इमं श्लोकं तदा वीर प्रेक्ष्य दीक्षां महात्मन:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वीर राजन! यहाँ महात्मा जमदग्नि का दीक्षा समारोह देखकर स्वयं गन्धर्वराज विश्वावसु ने यह श्लोक गाया था ॥18॥
 
Brave King! Here, after seeing the initiation ceremony of Mahatma Jamadagni, Gandharva king Vishwavasu himself sang this verse. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)