श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.90.15 
समेत्य बहुशो देवा: सेन्द्रा: सवरुणा: पुरा।
विशाखयूपेऽतप्यन्त तेन पुण्यतमश्च स:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में इन्द्र, वरुण आदि अनेक देवताओं ने मिलकर विशाखयूप नामक स्थान पर तपस्या की थी, अतः वह अत्यंत पवित्र स्थान है ॥15॥
 
In ancient times many gods including Indra, Varuna etc. had performed penance together at a place called Visakhayupa, hence it is an extremely pious place. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)