श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 11-13h
 
 
श्लोक  3.90.11-13h 
दृषद्वती महापुण्या यत्र ख्याता युधिष्ठिर।
न्यग्रोधाख्यस्तु पुण्याख्य: पाञ्चाल्यो द्विपदां वर॥ ११॥
दाल्भ्यघोषश्च दाल्भ्यश्च धरणीस्थो महात्मन:।
कौन्तेयानन्तयशस: सुव्रतस्यामितौजस:॥ १२॥
आश्रम: ख्यायते पुण्यस्त्रिषु लोकेषु विश्रुत:।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! परम पुण्यमयी दृषद्वती नदी का भी वहाँ उल्लेख है। मनुष्यों में श्रेष्ठ युधिष्ठिर! न्यग्रोध, पुण्य, पांचाल्य, दाल्भ्यघोष और दाल्भ्य ये पाँच आश्रम हैं तथा नित्य प्रसिद्ध एवं अमित तेजस्वी महात्मा सुव्रत का पुण्य आश्रम भी उत्तराखंड में बताया गया है, जो पृथ्वी पर रहते हुए भी तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं।
 
Yudhisthira! The most virtuous Drishadwati river is also mentioned there. Yudhishthira is the best among humans! Nyagrodha, Punya, Panchalya, Dalbhyagosh and Dalbhya are the five Ashrams and the Punya Ashram of the eternally famous and amit-tejasvi Mahatma Suvrata is also said to be in Uttarakhand, who is famous in all the three worlds despite living on earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)