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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 9: व्यासजीके द्वारा सुरभि और इन्द्रके उपाख्यानका वर्णन तथा उनका पाण्डवोंके प्रति दया दिखलाना
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श्लोक 6
श्लोक
3.9.6
अत्र ते कीर्तयिष्यामि महदाख्यानमुत्तमम्।
सुरभ्याश्चैव संवादमिन्द्रस्य च विशाम्पते॥ ६॥
अनुवाद
हे जनेश्वर! इस विषय में मैं आपसे एक बहुत ही अद्भुत कथा कहूँगा, जो सुरभि और इन्द्र के संवाद के रूप में है।
O Janeshwar! In this regard I shall narrate to you a very wonderful story; which is in the form of a conversation between Surabhi and Indra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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