श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 9: व्यासजीके द्वारा सुरभि और इन्द्रके उपाख्यानका वर्णन तथा उनका पाण्डवोंके प्रति दया दिखलाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.9.19 
तद् यथा सुरभि: प्राह समवेतास्तु ते तथा।
सुतेषु राजन् सर्वेषु हीनेष्वभ्यधिका कृपा॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इस विषय में सुरभि ने जो कहा है, वह ठीक है। कौरव और पाण्डव दोनों ही आपके पुत्र हैं। परन्तु हे राजन! समस्त पुत्रों में जो हीन और दयनीय अवस्था में हैं, उन पर ही सबसे अधिक दया करनी चाहिए॥19॥
 
What Surabhi has said in this context is correct. Both the Kauravas and the Pandavas are your sons. But, O King! Among all the sons, those who are inferior and in a pitiable condition should be shown the most mercy.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)