श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 9: व्यासजीके द्वारा सुरभि और इन्द्रके उपाख्यानका वर्णन तथा उनका पाण्डवोंके प्रति दया दिखलाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.9.15 
शक्र उवाच
तव पुत्रसहस्रेषु पीडॺमानेषु शोभने।
किं कृपायितवत्यत्र पुत्र एकत्र हन्यति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने कहा - कल्याणी ! तुम्हारे हजारों पुत्र इसी प्रकार दुःख भोग रहे हैं, फिर जब एक ही पुत्र मारा गया, तब तुमने इतनी दया क्यों की ?॥15॥
 
Indra said - Kalyani! Thousands of your sons are suffering in this manner, then why did you show so much compassion when only one son was killed?॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)