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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 9: व्यासजीके द्वारा सुरभि और इन्द्रके उपाख्यानका वर्णन तथा उनका पाण्डवोंके प्रति दया दिखलाना
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श्लोक 14
श्लोक
3.9.14
ततोऽहं तस्य शोकार्ता विरौमि भृशदु:खिता।
अश्रूण्यावर्तयन्ती च नेत्राभ्यां करुणायती॥ १४॥
अनुवाद
यह देखकर मैं दुःख से अत्यंत दुःखी और करुणा से अभिभूत होकर नेत्रों से आँसू बहाते हुए रो रहा हूँ ॥14॥
Seeing this I am extremely saddened by grief and overwhelmed with compassion, I am crying with tears flowing from my eyes. ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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