श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 9: व्यासजीके द्वारा सुरभि और इन्द्रके उपाख्यानका वर्णन तथा उनका पाण्डवोंके प्रति दया दिखलाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.9.10 
पश्यैनं कर्षकं क्षुद्रं दुर्बलं मम पुत्रकम्।
प्रतोदेनाभिनिघ्नन्तं लाङ्गलेन च पीडितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इस अभागे किसान को देखो, जो मेरे दुर्बल पुत्र को हल के नीचे अत्यन्त कष्ट सहते हुए बार-बार कोड़े से पीट रहा है ॥10॥
 
Look at this wretched farmer who is repeatedly beating my weak son with a whip while he is suffering terribly under the plough. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)