श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 9: व्यासजीके द्वारा सुरभि और इन्द्रके उपाख्यानका वर्णन तथा उनका पाण्डवोंके प्रति दया दिखलाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.9.1 
धृतराष्ट्र उवाच
भगवन्नाहमप्येतद् रोचये द्यूतसम्भवम्।
मन्ये तद्विधिनाऽऽकृष्य कारितोऽस्मीति वै मुने॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, "हे प्रभु! मुझे भी यह द्यूतक्रीड़ा अच्छी नहीं लगी। मुनिवर! मुझे ऐसा लगता है कि विधाता ने मुझे बलपूर्वक इस कार्य में खींच लिया है।"
 
Dhritarashtra said, "O Lord! I also did not like this game of gambling. Sage! I feel that the Creator forcibly pulled me into this task." 1.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)