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mahabharat 3.89.7: महाराज! उस पर्वत की चोटी पर एक पवित्र सरोवर है, जिसमें सदैव कमल खिले रहते हैं। महाराज! देवता और गंधर्व भी उस पवित्र स्थान पर आते हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.89: धौम्यद्वारा पश्चिम दिशाके तीर्थोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 89: धौम्यद्वारा पश्चिम दिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.89.7 
तस्य शैलस्य शिखरे सर: पुण्यं महीपते।
फुल्लपद्मं महाराज देवगन्धर्वसेवितम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस पर्वत की चोटी पर एक पवित्र सरोवर है, जिसमें सदैव कमल खिले रहते हैं। महाराज! देवता और गंधर्व भी उस पवित्र स्थान पर आते हैं।
 
King! There is a holy lake on the peak of that mountain in which lotuses are always in bloom. Maharaj! Even the gods and Gandharvas visit that holy place. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)