श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 89: धौम्यद्वारा पश्चिम दिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.89.6 
वैदूर्यशिखरो नाम पुण्यो गिरिवर: शिव:।
नित्यपुष्पफलास्तत्र पादपा हरितच्छदा:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
नर्मदा नदी के तट पर वैदूर्य शिखर नामक पवित्र एवं पावन पर्वत भी स्थित है। वहाँ हरे-भरे पत्तों से सुसज्जित तथा सदैव फल-फूलों से लदे वृक्ष शोभायमान होते हैं।
 
The sacred and auspicious mountain called Vaidurya Shikhar is also situated on the banks of Narmada river. There, trees adorned with green leaves and always laden with fruits and flowers look beautiful.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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