Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.89.2: भरतनंदन! पवित्र नदी नर्मदा पश्चिम दिशा में बहती है, इसकी धारा पूर्व से पश्चिम की ओर है। इसके तट पर प्रियंगु और आम के वृक्षों का वन है। बेंत और फलों के वृक्षों की श्रृंखलाएँ भी इसकी शोभा बढ़ाती हैं।॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 3.89: धौम्यद्वारा पश्चिम दिशाके तीर्थोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रियङ्ग्वाम्रवणोपेता वानीरफलमालिनी।
प्रत्यक्स्रोता नदी पुण्या नर्मदा तत्र भारत॥ २॥
अनुवाद
भरतनंदन! पवित्र नदी नर्मदा पश्चिम दिशा में बहती है, इसकी धारा पूर्व से पश्चिम की ओर है। इसके तट पर प्रियंगु और आम के वृक्षों का वन है। बेंत और फलों के वृक्षों की श्रृंखलाएँ भी इसकी शोभा बढ़ाती हैं।॥ 2॥
Bharatanandan! The holy river Narmada flows in the west, its current is from east to west. There is a forest of Priyangu and Mango trees on its banks. Ranges of cane and fruit trees also enhance its beauty.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥