Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.88.26-27: भगवान गोविन्द परम पवित्र कहे गए हैं, जो पवित्रों को भी पवित्र कर देते हैं। वे सज्जनों में भी अच्छे और सज्जनों के भी अच्छे हैं। कमलनयन देवाधिदेव सनातन श्रीहरि अविनाशी ईश्वर, व्ययात्मा (क्षरपुरुष), क्षेत्रज्ञ और परमेश्वर हैं। भगवान मधुसूदन का वह अकल्पनीय रूप द्वारकापुरी में विद्यमान है। 26-27॥ | mahabharat अध्याय 3.88: धौम्यमुनिके द्वारा दक्षिण दिशावर्ती तीर्थोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पवित्राणां हि गोविन्द: पवित्रं परमुच्यते।
पुण्यानामपि पुण्योऽसौ मङ्गलानां च मङ्गलम्।
त्रैलोक्ये पुण्डरीकाक्षो देवदेव: सनातन:॥ २६॥
अव्ययात्मा व्ययात्मा च क्षेत्रज्ञ: परमेश्वर:।
आस्ते हरिरचिन्त्यात्मा तत्रैव मधुसूदन:॥ २७॥
अनुवाद
भगवान गोविन्द परम पवित्र कहे गए हैं, जो पवित्रों को भी पवित्र कर देते हैं। वे सज्जनों में भी अच्छे और सज्जनों के भी अच्छे हैं। कमलनयन देवाधिदेव सनातन श्रीहरि अविनाशी ईश्वर, व्ययात्मा (क्षरपुरुष), क्षेत्रज्ञ और परमेश्वर हैं। भगवान मधुसूदन का वह अकल्पनीय रूप द्वारकापुरी में विद्यमान है। 26-27॥
Lord Govind is said to be the most holy one who purifies even the pure. He is the good of the good and the good of the good. Kamalanayan Devadhidev Sanatan Shri Hari is the indestructible God, Vyayatma (Ksharpurush), Kshetrapagya and Supreme God. That unimaginable form of Lord Madhusudan is present in Dwarkapuri. 26-27॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि धौम्यतीर्थयात्रायामष्टाशीतितमोऽध्याय:॥ ८८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें धौम्यतीर्थयात्राविषयक अठासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥