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mahabharat 3.88.2: दक्षिण में पवित्र गोदावरी नदी बहुत प्रसिद्ध है। उसके तट पर अनेक उद्यान सुशोभित हैं। वह अपार जल से भरी हुई है। अनेक तपस्वी उसका सेवन करते हैं और वह सबके लिए मंगलकारी है।॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 3.88: धौम्यमुनिके द्वारा दक्षिण दिशावर्ती तीर्थोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 88: धौम्यमुनिके द्वारा दक्षिण दिशावर्ती तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.88.2 
यस्यामाख्यायते पुण्या दिशि गोदावरी नदी।
बह्वारामा बहुजला तापसाचरिता शिवा॥ २॥
 
 
अनुवाद
दक्षिण में पवित्र गोदावरी नदी बहुत प्रसिद्ध है। उसके तट पर अनेक उद्यान सुशोभित हैं। वह अपार जल से भरी हुई है। अनेक तपस्वी उसका सेवन करते हैं और वह सबके लिए मंगलकारी है।॥ 2॥
 
In the south, the holy river Godavari is very famous. Many gardens are decorated on its banks. It is filled with immense water. Many ascetics use it and it is auspicious for everyone.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)