श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 87: धौम्यद्वारा पूर्वदिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  3.87.26-27h 
यत्र देववनं पुण्यं तापसैरुपशोभितम्॥ २६॥
बाहुदा च नदी यत्र नन्दा च गिरिमूर्धनि।
 
 
अनुवाद
वहाँ तपस्वियों से सुशोभित पवित्र देववन क्षेत्र है, जहाँ पर्वत शिखर पर बहुदा और नन्दा नदियाँ बहती हैं॥26 1/2॥
 
‘There is the sacred Devvan area, adorned by ascetics, where the rivers Bahuda and Nanda flow on the mountain top.॥ 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)