श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 87: धौम्यद्वारा पूर्वदिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.87.22 
महेन्द्रो नाम कौरव्य भार्गवस्य महात्मन:।
अयजत् तत्र कौन्तेय पूर्वमेव पितामह:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'कुरुनंदन! महेंन्द्र-पर्वत महात्मा भार्गवों की तपोस्थली है। कुन्तीनन्दन! प्राचीन काल में भगवान ब्रह्मा ने वहां यज्ञ किया था। 22॥
 
'Kurunandan! Mahendra-Parvat is the abode of Mahatma Bhargava. Kuntinandan! Lord Brahma had performed a yagya there in ancient times. 22॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas