श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 87: धौम्यद्वारा पूर्वदिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.87.18 
पवित्रमृषिभिर्जुष्टं पुण्यं पावनमुत्तमम्।
गङ्गायमुनयोर्वीर संगमं लोकविश्रुतम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'वीरवर! गंगा और यमुना का परम उत्तम एवं पवित्र संगम सम्पूर्ण जगत में प्रसिद्ध है तथा बड़े-बड़े ऋषिगण भी उसका सेवन करते हैं॥ 18॥
 
'Viraavar! The most excellent and holy confluence of Ganga and Yamuna is famous in the whole world and even great sages consume it.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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