vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 87: धौम्यद्वारा पूर्वदिशाके तीर्थोंका वर्णन
»
श्लोक 16
श्लोक
3.87.16
यत्रानुवंशं भगवाञ्जामदग्न्यस्तथा जगौ।
विश्वामित्रस्य तां दृष्ट्वा विभूतिमतिमानुषीम्॥ १६॥
अनुवाद
‘उसी यज्ञ में विश्वामित्र का अलौकिक तेज देखकर जमदग्निनन्दन परशुरामजी ने अपने वंश के अनुसार यश का वर्णन किया था ॥16॥
‘Seeing the supernatural splendor of Vishwamitra in the same yagya, Jamdagninandan Parshuram had described the fame according to his lineage. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×