श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 86: युधिष्ठिरका धौम्य मुनिसे पुण्य तपोवन, आश्रम एवं नदी आदिके विषयमें पूछना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.86.9 
सर्वे वेदविद: शूरा: सर्वास्त्रविदुषस्तथा।
योद्धुकामाश्च पार्थेन सततं ये महाबला:।
स च दिव्यास्त्रवित् कर्ण: सूतपुत्रो महारथ:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वे सभी वेदों के विद्वान, वीर योद्धा, समस्त अस्त्र-शस्त्रों के ज्ञाता, पराक्रमी हैं और अर्जुन के साथ युद्ध करने की सदैव इच्छा रखते हैं। वह सारथि पुत्र कर्ण भी दिव्यास्त्रों का ज्ञाता है॥9॥
 
‘All of them are scholars of Vedas, valiant warriors, experts in all weapons, mighty and always desire to fight with Arjun. That charioteer son Karna is also an expert in divine weapons.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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