श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 86: युधिष्ठिरका धौम्य मुनिसे पुण्य तपोवन, आश्रम एवं नदी आदिके विषयमें पूछना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.86.19 
यत्र कंचिद् वयं कालं वसन्त: सत्यविक्रमम्।
प्रतीक्षामोऽर्जुनं वीरं वृष्टिकामा इवाम्बुदम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'हम लोग यहाँ कुछ समय तक ठहरकर पुण्यात्मा एवं पराक्रमी अर्जुन के आगमन की प्रतीक्षा करें, जैसे वर्षा की इच्छा रखने वाला किसान बादलों की प्रतीक्षा करता है॥19॥
 
'Let us stay here for some time and await the arrival of the virtuous and valiant Arjuna, just as a farmer desiring rain waits for the clouds.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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