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mahabharat 3.86.16: अतः हम लोग निश्चय ही शत्रुओं का संहार करने वाले पाण्डुपुत्र अर्जुन को सम्पूर्ण दिव्यास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करके आते हुए देखेंगे; क्योंकि वह वीर योद्धा किसी कार्य को पूरा किए बिना कभी थकता नहीं है॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.86: युधिष्ठिरका धौम्य मुनिसे पुण्य तपोवन, आश्रम एवं नदी आदिके विषयमें पूछना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 86: युधिष्ठिरका धौम्य मुनिसे पुण्य तपोवन, आश्रम एवं नदी आदिके विषयमें पूछना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.86.16 
ते वयं पाण्डवं सर्वे गृहीतास्त्रमरिंदमम्।
द्रष्टारो न हि बीभत्सुर्भारमुद्यम्य सीदति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अतः हम लोग निश्चय ही शत्रुओं का संहार करने वाले पाण्डुपुत्र अर्जुन को सम्पूर्ण दिव्यास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करके आते हुए देखेंगे; क्योंकि वह वीर योद्धा किसी कार्य को पूरा किए बिना कभी थकता नहीं है॥16॥
 
‘Therefore we will certainly see Arjuna, the son of Pandu, the slayer of enemies, arriving after acquiring the knowledge of all the divine weapons; because that brave warrior never gets tired until he completes a task.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)