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mahabharat 3.85.98: इस सत्य तत्त्व को ब्राह्मण, द्विज, ऋषि, पुत्र, मित्र, शिष्य और उनका पालन करने वाले लोगों के कानों में कहना चाहिए ॥98॥   |   mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  3.85.98 
इदं सत्यं द्विजातीनां साधूनामात्मजस्य च।
सुहृदां च जपेत् कर्णे शिष्यस्यानुगतस्य च॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
इस सत्य तत्त्व को ब्राह्मण, द्विज, ऋषि, पुत्र, मित्र, शिष्य और उनका पालन करने वाले लोगों के कानों में कहना चाहिए ॥98॥
 
This true principle should be told in the ears of Brahmins, Dwijas, sages, sons, friends, disciples and people who follow them. 98॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)