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mahabharat 3.85.92: पुष्कर, कुरुक्षेत्र, गंगा और प्रयाग आदि मध्यवर्ती तीर्थस्थानों में स्नान करके मनुष्य अपने से पहले और बाद की सात पीढ़ियों को मुक्ति प्रदान करता है ॥92॥   |   mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  3.85.92 
पुष्करे तु कुरुक्षेत्रे गङ्गायां मध्यमेषु च।
स्नात्वा तारयते जन्तु: सप्तसप्तावरांस्तथा॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
पुष्कर, कुरुक्षेत्र, गंगा और प्रयाग आदि मध्यवर्ती तीर्थस्थानों में स्नान करके मनुष्य अपने से पहले और बाद की सात पीढ़ियों को मुक्ति प्रदान करता है ॥92॥
 
By taking bath in the intermediate pilgrimage places like Pushkar, Kurukshetra, Ganga and Prayag, a man liberates his seven generations before and after him. ॥92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)