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mahabharat 3.85.9: कुरुनन्दन! शोण और नर्मदा के उद्गम स्थान वंशगुल्म तीर्थ में स्नान करने से तीर्थयात्री को अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है। 9॥   |   mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.85.9 
शोणस्य नर्मदायाश्च प्रभवे कुरुनन्दन।
वंशगुल्म उपस्पृश्य वाजिमेधफलं लभेत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! शोण और नर्मदा के उद्गम स्थान वंशगुल्म तीर्थ में स्नान करने से तीर्थयात्री को अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है। 9॥
 
Kurunandan! By taking bath in Vanshgulm Tirtha, the origin place of Shona and Narmada, the pilgrim gets the fruits of Ashvamedha Yagya. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)