vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य
»
श्लोक 9
श्लोक
3.85.9
शोणस्य नर्मदायाश्च प्रभवे कुरुनन्दन।
वंशगुल्म उपस्पृश्य वाजिमेधफलं लभेत्॥ ९॥
अनुवाद
कुरुनन्दन! शोण और नर्मदा के उद्गम स्थान वंशगुल्म तीर्थ में स्नान करने से तीर्थयात्री को अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है। 9॥
Kurunandan! By taking bath in Vanshgulm Tirtha, the origin place of Shona and Narmada, the pilgrim gets the fruits of Ashvamedha Yagya. 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×