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mahabharat 3.85.87: कुरुनन्दन! त्रिलोक में प्रसिद्ध हंसप्रापतन नामक तीर्थ है और गंगाजी के तट पर दशाश्वमेध तीर्थ है॥87॥   |   mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.85.87 
तत्र हंसप्रपतनं तीर्थं त्रैलोक्यविश्रुतम्।
दशाश्वमेधिकं चैव गङ्गायां कुरुनन्दन॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! त्रिलोक में प्रसिद्ध हंसप्रापतन नामक तीर्थ है और गंगाजी के तट पर दशाश्वमेध तीर्थ है॥87॥
 
Kurunandan! There is a pilgrimage named Hansprapatan famous in Trilok and Dashashwamedh pilgrimage on the banks of Ganga. 87॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)