श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य  »  श्लोक 69-75
 
 
श्लोक  3.85.69-75 
ततो गच्छेत राजेन्द्र प्रयागमृषिसंस्तुतम्॥ ६९॥
तत्र ब्रह्मादयो देवा दिशश्च सदिगीश्वरा:।
लोकपालाश्च साध्याश्च पितरो लोकसम्मता:॥ ७०॥
सनत्कुमारप्रमुखास्तथैव परमर्षय:।
अङ्गिर:प्रमुखाश्चैव तथा ब्रह्मर्षयोऽमला:॥ ७१॥
तथा नागा: सुपर्णाश्च सिद्धाश्चक्रचरास्तथा।
सरित: सागराश्चैव गन्धर्वाप्सरसोऽपि च॥ ७२॥
हरिश्च भगवानास्ते प्रजापतिपुरस्कृत:।
तत्र त्रीण्यग्निकुण्डानि येषां मध्येन जाह्नवी॥ ७३॥
वेगेन समतिक्रान्ता सर्वतीर्थपुरस्कृता।
तपनस्य सुता देवी त्रिषु लोकेषु विश्रुता॥ ७४॥
यमुना गङ्गया सार्धं संगता लोकपावनी।
गङ्गायमुनयोर्मध्यं पृथिव्या जघनं स्मृतम्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! तत्पश्चात् महर्षियों द्वारा प्रशंसित प्रयागतीर्थ में जाओ। जहाँ ब्रह्मा, दिशा, दिक्पाल, लोकपाल, साध्य, सुप्रतिष्ठित पितर, सनत्कुमार आदि महर्षि, अंगिरा आदि शुद्ध ब्रह्मर्षि, नाग, सुपर्ण, सिद्ध, सूर्य, नदी, समुद्र, गन्धर्व, अप्सराएँ और ब्रह्माजी आदि देवताओं के साथ भगवान विष्णु निवास करते हैं। वहाँ तीन अग्निकुण्ड हैं जिनसे होकर समस्त तीर्थों से परिपूर्ण गंगाजी वेगपूर्वक प्रवाहित होती हैं। त्रिभुवन: वहाँ प्रसिद्ध सूर्यपुत्री, पवित्र यमुनादेवी गंगाजी के साथ मिलती हैं। गंगा और यमुना का मध्य भाग पृथ्वी का जघन भाग माना जाता है। 69-75॥
 
Rajendra! After that go to Prayagtirtha praised by Maharishis. Where Lord Vishnu resides along with gods like Brahma, Disha, Dikpal, Lokpal, Sadhya, well-respected ancestors, Sanatkumar etc., Maharshi, Angira etc., pure Brahmarshi, Naga, Suparna, Siddha, Sun, River, Sea, Gandharva, Apsara and Brahmaji. There are three fire pits through which the Ganga, full of all the holy places, flows swiftly. Tribhuvan: The famous Suryaputri, the holy Yamunadevi is found there with Gangaji. The middle part of Ganga and Yamuna is considered to be the pubic part of the earth. 69-75॥
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