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mahabharat 3.85.65: राजेंद्र! वहाँ से महान श्रृंगवेरपुर की यात्रा करें। महाराज! प्राचीन काल में दशरथनन्दन श्री रामचन्द्रजी ने वहीं गंगा पार की थी। 65॥   |   mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  3.85.65 
ततो गच्छेत राजेन्द्र शृङ्गवेरपुरं महत्।
यत्र तीर्णो महाराज रामो दाशरथि: पुरा॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
राजेंद्र! वहाँ से महान श्रृंगवेरपुर की यात्रा करें। महाराज! प्राचीन काल में दशरथनन्दन श्री रामचन्द्रजी ने वहीं गंगा पार की थी। 65॥
 
Rajendra! From there travel to the great Shringaverpur. Maharaj! In ancient times, Dashrathanandan Shri Ramchandraji had crossed the Ganga there. 65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)