Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.85.6: तत्पश्चात् सभी पापों से मुक्ति देने वाली वैतरणी नदी की यात्रा करनी चाहिए। वहाँ जाकर विराजतीर्थ में स्नान करने से मनुष्य चन्द्रमा के समान प्रकाशवान हो जाता है। | mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् सभी पापों से मुक्ति देने वाली वैतरणी नदी की यात्रा करनी चाहिए। वहाँ जाकर विराजतीर्थ में स्नान करने से मनुष्य चन्द्रमा के समान प्रकाशवान हो जाता है।
Thereafter one should travel to Vaitarni river which liberates one from all sins. By going there and taking a bath in Virajtirtha, one becomes as luminous as the moon.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥