श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  3.85.56 
अत्र कालञ्जरं नाम पर्वतं लोकविश्रुतम्।
तत्र देवह्रदे स्नात्वा गोसहस्रफलं लभेत्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
इस तीर्थस्थान में कालंजर नामक प्रसिद्ध पर्वत है। वहाँ देवह्रद नामक तीर्थस्थान में स्नान करने से एक हजार गौदान का फल मिलता है ॥ 56॥
 
In this pilgrimage place there is a famous mountain called Kalanjar. Bathing in the pilgrimage place called Devhrad there gives the reward of donating a thousand cows. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)