vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य
»
श्लोक 43
श्लोक
3.85.43
तत: शूर्पारकं गच्छेज्जामदग्न्यनिषेवितम्।
रामतीर्थे नर: स्नात्वा विन्द्याद् बहुसुवर्णकम्॥ ४३॥
अनुवाद
तत्पश्चात् परशुरामजी की सेवा में शूर्पर्कतीर्थ जाओ। वहाँ रामतीर्थ में स्नान करने से मनुष्य प्रचुर मात्रा में स्वर्ण प्राप्त करता है ॥43॥
After that, go to Shurparkatirtha in the service of Parashuram. By taking bath in Ramtirtha there, a person gets abundant amount of gold. 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×