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mahabharat 3.85.4: राजेन्द्र! वहाँ गंगासागर संगम में स्नान करने से दस अश्वमेध्याय का फल मिलता है, ऐसा बुद्धिमान पुरुष कहते हैं॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.85.4 
गङ्गायास्तत्र राजेन्द्र सागरस्य च संगमे।
अश्वमेधं दशगुणं प्रवदन्ति मनीषिण:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! वहाँ गंगासागर संगम में स्नान करने से दस अश्वमेध्याय का फल मिलता है, ऐसा बुद्धिमान पुरुष कहते हैं॥4॥
 
Rajendra! By taking bath in Gangasagar Sangam there, one gets the fruits of ten Ashvamedhyayas, this is what the wise men say. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)