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mahabharat 3.85.35-36h: वरदसंगम तीर्थ में स्नान करने से एक हजार गायों के दान का फल मिलता है। जो व्यक्ति ब्रह्मस्थान में जाकर तीन रातों तक उपवास करता है, उसे एक हजार गायों के दान का फल मिलता है और वह स्वर्ग जाता है।   |   mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  3.85.35-36h 
वरदासंगमे स्नात्वा गोसहस्रफलं लभेत्।
ब्रह्मस्थानं समासाद्य त्रिरात्रोपोषितो नर:॥ ३५॥
गोसहस्रफलं विन्द्यात् स्वर्गलोकं च गच्छति।
 
 
अनुवाद
वरदसंगम तीर्थ में स्नान करने से एक हजार गायों के दान का फल मिलता है। जो व्यक्ति ब्रह्मस्थान में जाकर तीन रातों तक उपवास करता है, उसे एक हजार गायों के दान का फल मिलता है और वह स्वर्ग जाता है।
 
Bathing in Varadasangam Tirtha gives the fruit of donating a thousand cows. A person who goes to Brahmsthan and fasts for three nights gets the fruit of donating a thousand cows and goes to heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)