Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.85.30: राजा! यदि वर्णसंकर कुल में उत्पन्न हुआ कोई व्यक्ति गायत्री मन्त्र का जप करता है, तो वह उसके मुख से स्वर और वर्ण के नियमों से रहित गाथा या गीत के समान निकलता है; अर्थात् वह गायत्री मन्त्र का शुद्ध उच्चारण नहीं कर सकता। ॥30॥ | mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा! यदि वर्णसंकर कुल में उत्पन्न हुआ कोई व्यक्ति गायत्री मन्त्र का जप करता है, तो वह उसके मुख से स्वर और वर्ण के नियमों से रहित गाथा या गीत के समान निकलता है; अर्थात् वह गायत्री मन्त्र का शुद्ध उच्चारण नहीं कर सकता। ॥30॥
King! If a person born in a mixed caste recites the Gayatri Mantra, it comes out of his mouth like a ballad or a song, without the rules of vowels and letters; that is, he cannot pronounce the Gayatri Mantra correctly. ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥