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mahabharat 3.85.27: जो मनुष्य भगवान शिव की पूजा करता है और तीन रातों तक उपवास करता है, उसे अश्वमेध्ययज्ञ का फल मिलता है और वह गणपति पद को प्राप्त करता है ॥27॥   |   mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.85.27 
तत्रेशानं समभ्यर्च्य त्रिरात्रोपोषितो नर:।
अश्वमेधमवाप्नोति गाणपत्यं च विन्दति॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य भगवान शिव की पूजा करता है और तीन रातों तक उपवास करता है, उसे अश्वमेध्ययज्ञ का फल मिलता है और वह गणपति पद को प्राप्त करता है ॥27॥
 
A person who worships Lord Shiva and fasts for three nights gets the results of Ashwamedhyayagya and attains the status of Ganapati. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)