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mahabharat 3.85.22: राजा! इसके बाद अप्सराओं से घिरी कावेरी नदी का दर्शन करना चाहिए। वहाँ स्नान करने से मनुष्य को एक हजार गायों के दान का फल मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.85.22 
ततो गच्छेत कावेरीं वृतामप्सरसां गणै:।
तत्र स्नात्वा नरो राजन् गोसहस्रफलं लभेत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
राजा! इसके बाद अप्सराओं से घिरी कावेरी नदी का दर्शन करना चाहिए। वहाँ स्नान करने से मनुष्य को एक हजार गायों के दान का फल मिलता है।
 
King! After that one should visit the river Kaveri which is surrounded by Apsaras. By taking bath there, a person gets the reward of donating a thousand cows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)