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mahabharat 3.85.2: राजन! श्री राम के प्रभाव से प्राचीन काल में जो तीर्थ प्रकट हुआ था, उसका नाम लौहित्यतीर्थ है। उसमें जाकर स्नान करने से मनुष्य को बहुत सारा सोना प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.85.2 
रामस्य च प्रभावेण तीर्थं राजन् कृतं पुरा।
तल्लौहित्यं समासाद्य विन्द्याद् बहु सुवर्णकम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजन! श्री राम के प्रभाव से प्राचीन काल में जो तीर्थ प्रकट हुआ था, उसका नाम लौहित्यतीर्थ है। उसमें जाकर स्नान करने से मनुष्य को बहुत सारा सोना प्राप्त होता है।
 
Rajan! The name of the pilgrimage that appeared in ancient times due to the influence of Shri Ram is Lauhityatirtha. By going and taking bath in it, a person gets a lot of gold. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)