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mahabharat 3.85.16-17h: तत्पश्चात परशुरामजी द्वारा सेवित महेन्द्र पर्वत पर जाकर वहाँ के रामतीर्थ में स्नान करने से मनुष्य अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करता है ॥16 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  3.85.16-17h 
ततो महेन्द्रमासाद्य जामदग्न्यनिषेवितम्॥ १६॥
रामतीर्थे नर: स्नात्वा अश्वमेधफलं लभेत्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात परशुरामजी द्वारा सेवित महेन्द्र पर्वत पर जाकर वहाँ के रामतीर्थ में स्नान करने से मनुष्य अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करता है ॥16 1/2॥
 
Thereafter, by going to the Mahendra mountain served by Parashurama and taking a bath in the Rama tirtha there, a man gets the fruits of performing Ashwamedha sacrifice. ॥16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)