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mahabharat 3.85.14-15h: तत्पश्चात चम्पा जाकर भागीरथी की पूजा करें और दण्ड नामक तीर्थस्थान में जाकर हजार गोदान का फल प्राप्त करें। 14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  3.85.14-15h 
अथ चम्पां समासाद्य भागीरथ्यां कृतोदक:॥ १४॥
दण्डाख्यमभिगम्यैव गोसहस्रफलं लभेत्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात चम्पा जाकर भागीरथी की पूजा करें और दण्ड नामक तीर्थस्थान में जाकर हजार गोदान का फल प्राप्त करें। 14 1/2॥
 
After that, go to Champa and offer prayers to Bhagirathi and go to the pilgrimage place named Dand and get the fruit of thousand Godan. 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)