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mahabharat 3.85.116: कुन्तीनन्दन! तुम पुण्यात्मा भीष्म से आठ गुना श्रेष्ठ धर्म को प्राप्त करोगे, जिन्होंने पहले तीर्थयात्रा का पुण्य प्राप्त किया था ॥116॥   |   mahabharat अध्याय 3.85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  3.85.116 
ततश्चाष्टगुणं पार्थ प्राप्स्यसे धर्ममुत्तमम्।
भीष्म: कुरूणां प्रवरो यथापूर्वमवाप्तवान्॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! तुम पुण्यात्मा भीष्म से आठ गुना श्रेष्ठ धर्म को प्राप्त करोगे, जिन्होंने पहले तीर्थयात्रा का पुण्य प्राप्त किया था ॥116॥
 
Kuntinandan! You will attain eight times better religion than the virtuous Bhishma who had previously attained the virtue of pilgrimage. 116॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)