श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  3.84.97 
एष्टव्या बहव: पुत्रा यद्येकोऽपि गयां व्रजेत्।
यजेत वाश्वमेधेन नीलं वा वृषमुत्सृजेत्॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
वह अनेक पुत्रों की कामना कर सकता है। सम्भव है कि उनमें से कोई गया जाकर अश्वमेध यज्ञ करे अथवा नील बैल की बलि दे ॥97॥
 
He may desire many sons. It is possible that one of them may go to Gaya or perform the Ashwamedha Yajna or sacrifice a blue bull. ॥97॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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