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श्लोक 3.84.97  |
एष्टव्या बहव: पुत्रा यद्येकोऽपि गयां व्रजेत्।
यजेत वाश्वमेधेन नीलं वा वृषमुत्सृजेत्॥ ९७॥ |
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| अनुवाद |
| वह अनेक पुत्रों की कामना कर सकता है। सम्भव है कि उनमें से कोई गया जाकर अश्वमेध यज्ञ करे अथवा नील बैल की बलि दे ॥97॥ |
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| He may desire many sons. It is possible that one of them may go to Gaya or perform the Ashwamedha Yajna or sacrifice a blue bull. ॥97॥ |
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