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mahabharat 3.84.96: हे राजन! जो मनुष्य कृष्ण और शुक्ल पक्ष दोनों में गया तीर्थ में निवास करता है, वह अपने कुल को सातवीं पीढ़ी तक पवित्र कर देता है, इसमें कोई संदेह नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 3.84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  3.84.96 
कृष्णशुक्लावुभौ पक्षौ गयायां यो वसेन्नर:।
पुनात्यासप्तमं राजन् कुलं नास्त्यत्र संशय:॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जो मनुष्य कृष्ण और शुक्ल पक्ष दोनों में गया तीर्थ में निवास करता है, वह अपने कुल को सातवीं पीढ़ी तक पवित्र कर देता है, इसमें कोई संदेह नहीं है।
 
O King! A person who resides at the Gaya Tirtha during both the dark and bright fortnights, purifies his family up to the seventh generation, there is no doubt about it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)