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mahabharat 3.84.92: वहाँ यात्रा करने से ब्राह्मण को बारह वर्ष तक व्रत करने का फल मिलता है और अन्य जातियों के लोगों के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं ॥92॥   |   mahabharat अध्याय 3.84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  3.84.92 
ब्राह्मणेन भवेच्चीर्णं व्रतं द्वादशवार्षिकम्।
इतरेषां तु वर्णानां सर्वपापं प्रणश्यति॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ यात्रा करने से ब्राह्मण को बारह वर्ष तक व्रत करने का फल मिलता है और अन्य जातियों के लोगों के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं ॥92॥
 
By travelling there a Brahmin gets the reward of observing a fast for twelve years and all the sins of people of other castes are destroyed. ॥92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)