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श्लोक 3.84.78  |
ततो वाराणसीं गत्वा अर्चयित्वा वृषध्वजम्।
कपिलाह्रदे नर: स्नात्वा राजसूयमवाप्नुयात्॥ ७८॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् वाराणसी (काशी) तीर्थ में जाकर भगवान शंकर का पूजन करें और कपिलाहृद में स्नान करें; इससे मनुष्य राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त करता है ॥78॥ |
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| Thereafter go to Varanasi (Kashi)-Teerth and worship Lord Shankar and take a dip in Kapilahrad; By this man gets the fruits of Rajasuya Yagya. 78॥ |
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